Judge Kaise Bane? 2022 में जज बनने से जुड़ी संपूर्ण जानकारी

विद्यार्थी अपने करियर को लेकर बहुत ज्यादा परेशान रहता है। विद्यार्थी को हमेशा अपने करियर को बनाने की एक इच्छा रहती है और कई विद्यार्थी जो कानून की डिग्रियां हासिल करना और कानून के क्षेत्र में अपना करियर बनाना पसंद करते हैं। हर विद्यार्थी अपने अनुसार अपने करियर को बनाने का निर्णय लेते हैं। जो लोग कानून की डिग्री प्राप्त करके Judge बनने की इच्छा रखते हैं।

यानी कि न्यायाधीश बनने के लिए विद्यार्थी तैयारी कर रहे हैं। उन विद्यार्थियों के लिए आज का आर्टिकल काफी ज्यादा महत्वपूर्ण साबित होगा आज के आर्टिकल में हम आपको जज कैसे बने? (Judge kaise bane?) और न्यायधीश कैसे बने? इसके बारे में डिटेल में जानकारी देने का प्रयास करें।

Judge कौन होते हैं?

हमारे आसपास यानी कि किसी भी जिला या तहसील में न्यायालय अवश्य होता है और उच्च न्यायालय में जो न्याय करता है। उसे न्यायधीश कहा जाता है। यानी कि किसी भी अपराध में जो अपराधी गिरफ्तार हो सकता है। उस अपराधी को सजा देना और उस अपराधी के खिलाफ सही व गलत का फैसला करना न्यायधीश का काम होता है। इस प्रकार के फैसले करने वाले व्यक्ति को न्यायधीश यानी कि जज कहा जाता है।

जज बनने के लिए जरूरी योग्यता

कोई भी विद्यार्थी जब छोटी कक्षा में पढ़ते समय न्यायाधीश बनने का सपना देखता है। यानी कि जज बनने का सपना देखता है तो उस विद्यार्थी को कई योग्यताएं जो जज बनने के लिए जरूरी है। इसके बारे में जानकारी नहीं होती है। लेकिन जैसे जैसे विद्यार्थी बड़ी कक्षाओं में प्रवेश लेता है और कानून की डिग्री लेना शुरु करता है। तो विद्यार्थी को जज बनने के लिए जरूरी योग्यता के बारे में भी भनक लग जाती है। जज बनने के लिए जरूरी योग्यता नीचे कुछ इस प्रकार से दी गई हैः

  • जज बनने के लिए विद्यार्थी के पास 12वीं कक्षा का सर्टिफिकेट और उसके बाद किसी भी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से Law की ग्रेजुएशन डिग्री होना अनिवार्य है।
  • विद्यार्थी के पास 7 साल का कानूनी अनुभव होना अनिवार्य है। यह अनुभव विद्यार्थी वकील के तौर पर हासिल कर सकता है।
  • विद्यार्थी वकील बनकर यानी कि लॉ की पढ़ाई पूरी करने के बाद वकील बन सकता है और वकील बनकर 7 साल का अनुभव प्राप्त करके न्यायाधीश बनने के लिए योग्य हो सकता है।
  • न्यायधीश की उम्र 62 वर्ष से कम होना अनिवार्य है। 62 साल से कम उम्र के उम्मीदवारों को न्यायधीश के लिए योग्य माना जाता है।
  • जज बनने वाले उम्मीदवार के पास हर स्थिति को सही तरीके से समझने की क्षमता होनी चाहिए।
  • उस स्थिति पर बेहतर संज्ञान लेते हुए गलत हुआ सही निर्णय लेने की क्षमता होना अनिवार्य है।
  • न्याय जी यानी कि जज को हमेशा ईमानदारी के साथ हर फैसले का निर्णय लेना चाहिए। क्योंकि ईमानदारी ही जज की प्रमुख उपाधि मानी जाती है।
  • जज के भरोसे लाखों मुकदमें होते हैं और ऐसे में जज का खुद का ईमानदार होना और सही गलत का निर्णय लेना बहुत जरूरी है।

जज कैसे बने? (Judge kaise bane in Hindi 2022?)

Judge Kaise Bane? 2022 में जज बनने से जुड़ी संपूर्ण जानकारी

जो विद्यार्थी जज बनने का सपना देख रहा है। उस विद्यार्थी को सबसे पहले लॉ की पढ़ाई पूरी करनी होगी। लॉ की पढ़ाई करने के बाद भी जज बनने की एक विशेष प्रक्रिया निर्धारित की गई है जो नीचे दी गई है। विद्यार्थी कानून में स्नातक करने के पश्चात जज बनने के लिए नीचे दी गई निम्नलिखित प्रक्रिया के माध्यम से जज बन सकता है।

भारत सरकार के द्वारा न्यायधीश यानी कि जज के लिए मुख्य तौर पर CLAT परीक्षा का आयोजन किया जाता है। विद्यार्थी 12वीं कक्षा के बाद LLB की डिग्री हासिल करके और 7 साल का अनुभव लेने के पश्चात इस परीक्षा में आवेदन लगा सकता है।

प्रारंभिक परीक्षा

विद्यार्थी जज बनने के बारे में सोच रहा है। तो विद्यार्थी को परीक्षा पैटर्न सिलेक्शन प्रोसेस के साथ-साथ परीक्षाओं के बारे में भी जानकारी लेनी होगी जज बनने के लिए विद्यार्थी संपूर्ण तरीके से योग्य हो जाता है। तो उसके बाद विद्यार्थी सरकार के द्वारा निकाली जाने वाली न्यायधीश भर्ती में अपना आवेदन लगा सकता है।

इसके लिए सबसे पहले विद्यार्थी को प्रारंभिक परीक्षा में अपनी भूमिका निभाते हुए प्रारंभिक परीक्षा को पास करना होगा प्रारंभिक परीक्षा जो सामान्य ज्ञान के सवालों पर आधारित और लोगों के सवालों पर आधारित होती है। प्रारंभिक परीक्षा में 2 पेपर होते हैं। पहला पेपर पूरी तरह से सामान्य ज्ञान पर आधारित होता है। यह पेपर 150 अंकों का होता है और इस पेपर को हल करने के लिए उम्मीदवार को 2 घंटे का समय दिया जाता है।

प्रारंभिक परीक्षा का दूसरा पेपर जो लोग पर आधारित होता है। यह पेपर 300 अंक का होता है और इस पेपर को हल करने के लिए भी विद्यार्थी को 2 घंटे का समय दिया जाता है।

मुख्य परीक्षा

 जो विद्यार्थी प्रारंभिक परीक्षा में सफल रहे जाते हैं यानी कि प्रारंभिक परीक्षा के रिजल्ट में जिन विद्यार्थियों का चयन होता है। उन विद्यार्थियों को आगे मुख्य परीक्षा में शामिल होने का मौका मिलता है।

मुख्य परीक्षा में मौका मिलने के बाद आपको कुल 5 पेपर क्लियर करने होते हैं। मुख्य परीक्षा में 5 पेपर आपके सामने उपलब्ध होते हैं और प्रत्येक पेपर को हल करने के लिए आपको 3 घंटे का समय दिया जाता है।

  • मुख्य परीक्षा का पहला पेपर जो जनरल नॉलेज यानी कि सामान्य ज्ञान पर आधारित होता है और यह पेपर 150 अंक का है।
  • मुख्य परीक्षा का दूसरा पेपर भाषा पर आधारित होता है यह पेपर 200 अंक का है और इस पेपर को हल करने के लिए 3 घंटे का समय मिलता है।
  • मुख्य परीक्षा का तीसरा पेपर LAW 1 Substantive Law का होता है यह एग्जाम 200 अंक का होगा और इस एग्जाम के लिए उम्मीदवार को 3 घंटे का समय मिलता है।
  • मुख्य परीक्षा का चौथा पेपर LAW 2 Procedure And Evidence  का होता है। यह एग्जाम 200 अंक का होता है। इस एग्जाम को हल करने के लिए 3 घंटे का समय मिलता है।
  • मुख्य परीक्षा का पांचवा पेपर  LAW 3 Penal, Revenue And Local News का होता है। यह पेपर 200 अंक का है और इस पेपर को हल करने के लिए उम्मीदवार को 3 घंटे का समय दिया जाता है।

मुख्य परीक्षा के पांच पेपर होने के बाद एक बार पुनः रिजल्ट की घोषणा होती है और इस रिजल्ट में चयनित होने वाले उम्मीदवार को आगे साक्षात्कार के लिए बुलाया जाता है। जानकारी के लिए बताना चाहूंगा कि प्रारंभिक परीक्षा की तुलना में मुख्य परीक्षा का लेवल काफी उच्च स्तरीय होता है। और प्रारंभिक परीक्षा की तुलना में मुख्य परीक्षा काफी कठिन होती है।

साक्षात्कार

जो उम्मीदवार प्रारंभिक परीक्षा और मुख्य परीक्षा दोनों परीक्षाओं को पास कर लेते हैं। उम्मीदवारों को अगले चरण के तौर पर साक्षात्कार में बुलाया जाता है। साक्षात्कार 100 अंक का होता है। यह जज बनने की प्रक्रिया का अंतिम चरण भी होता है। उम्मीदवार के लिए 100अंक का काफी ज्यादा मायने रखता है। साक्षात्कार में किसी भी तरह के सवाल पूछे जा सकते हैं। साक्षात्कार में सफल होने वाले उम्मीदवार को जज के पद के लिए नियुक्त कर दिया जाता है।

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उच्च न्यायालय के जज कैसे बने? (High Court me Judge kaise bane?)

भारत में करीब 25 उच्च न्यायालय मौजूद है। उच्च न्यायालय के जज बनने के लिए सबसे मुख्य उम्मीदवार भारत का नागरिक होने के साथ-साथ 10 साल का न्यायिक कार्य का अनुभव होना अनिवार्य है। 10 साल तक आप वकील के तौर पर कानून का अनुभव करके उसके बाद उच्च जाने के जज के लिए निकलने वाली भर्ती में आवेदन कर सकते हैं। सामान्यत जज और उच्च न्यायालय जज के परीक्षा का पैटर्न समान ही रहता है।

  1. प्रारंभिक परीक्षा
  2. मुख्य परीक्षा
  3. साक्षात्कार

सुप्रीम कोर्ट के जज कैसे बने? (Supreme Court ke Judge kaise bane?)

सुप्रीम कोर्ट के जज बनने के लिए उम्मीदवार के पास 5 साल का हाई कोर्ट न्यायाधीश के रूप में अनुभव होना अनिवार्य है। कहने का मतलब यह है, कि हाईकोर्ट के जज बनने के बाद ही आप सुप्रीम कोर्ट के जज बन सकते हैं सीधा सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में चयनित होने का कोई भी तरीका नहीं।

हाई कोर्ट के जज के तौर पर यदि आपके कार्य की वार्षिक रिपोर्ट बेहतरीन लेती हैं। तो ऐसे में आप को सुप्रीम कोर्ट के जज के पद पर प्रमोट कर दिया जाता है या फिर सुप्रीम कोर्ट के जज के लिए निकलने वाली भर्ती में भी आप अपना आवेदन अनुभव के आधार पर लगा सकते हैं और चयनित हो सकते हैं।

जज की सैलरी कितनी होती है? ()

जज भारत का एक सम्मानजनक पद होने के साथ-साथ काफी ऊंचा पद भी है। सुप्रीम कोर्ट के जज के पास राष्ट्रपति से ज्यादा पावर होते हैं। यानी कि सुप्रीम कोर्ट का जज राष्ट्रपति को नियुक्त करने और राष्ट्रपति को पद से हटाने की ताकत रखता है। जज की सैलरी की बात की जाए तो हाईकोर्ट के जज की सैलरी अलग होती है। तो सुप्रीम कोर्ट के जज की सैलरी अलग होती है। अलग-अलग लेवल के आधार पर का प्रावधान अलग अलग तरीके से सरकार के द्वारा किया जाता है।

सामान्य मुंशी कोर्ट के जज की सैलरी की बात की जाए तो सामान्यत सिविल कोर्ट के जज को ₹1,50,000 प्रति महीना सैलरी मिलती है। साथ ही साथ ₹20000 का सरकारी भत्ता भी मिलता है। इसके अलावा और अन्य कई प्रकार के जैसे कि महंगाई भत्ता घर, किराया भत्ता इत्यादि भी प्रदान करवाया जाता है।

हाई कोर्ट के जज की सैलरी की बात की जाए तो हाई कोर्ट के जज की सैलरी ₹225000 से लेकर ₹250000 प्रति महीना दी जाती है। हाई कोर्ट के जज की बेसिक सैलरी के साथ-साथ उन्हें ₹27000 से लेकर ₹34000 सरकार भत्ता भी दिया जाता है। साथ ही साथ महंगाई भत्ता, घर किराया भत्ता इन सभी सुविधाओं से हाई कोर्ट के जज को लाभान्वित किया जाता है।

सुप्रीम कोर्ट के जज की सैलरी की बात की जाए तो सुप्रीम कोर्ट के जज की सैलरी ₹250000 से लेकर ₹230000 तक होती है। बेसिक सैलरी के साथ साथ सुप्रीम कोर्ट के जज को ₹40000 सरकार का भत्ता दिया जाता है। उसके अलावा महंगाई भत्ता, घर किराया भत्ता और अन्य कई प्रकार की सुविधाएं और संपूर्ण सुरक्षा के उचित प्रबंधन की सुविधाएं भी मिलती है।

निष्कर्ष

देश का हर एक नौजवान अपने आपको एक बेहतरीन पद पर चयनित करके खुद का और अपने माता-पिता ओं का नाम रोशन करना चाहता है। लेकिन कई बार आर्थिक तंगी और पैसों के अभाव के चलते देश के लाखों नौजवानों को पढ़ाई छोड़कर प्राइवेट नौकरी करनी पड़ती है। लेकिन जो विद्यार्थी पढ़ाई को किसी भी हालत में नहीं छोड़ना चाहते हैं।

पढ़ाई करके एक अच्छा सरकारी पद हासिल करना चाहते हैं। तो उन विद्यार्थियों के लिए जज बनने का एक सुनहरा अवसर है। कानून की पढ़ाई कर चुके विद्यार्थियों के लिए जज बनकर देश की सेवा करना एक सुनहरा अवसर है। आज के आर्टिकल में हमने आपको Judge kaise bane? इसके बारे में डिटेल में जानकारी दी है।

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